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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख की तत्काल सुनवाई की अर्जी नामंजूर की

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा की तत्काल सुनवाई की अर्जी आज नामंजूर कर दी जिसमें राय ने अपनी बुआ के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जमानत पर रिहा किए जाने का अनुरोध किया था.  राय के वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू के आवास पर यह अर्जी पेश की. न्‍यायमूर्ति दत्तू ने कहा कि इसमें तत्काल सुनवाई का कोई मामला नहीं बनता है और इस पर नियमित अदालत में ही सुनवाई की जाएगी.  

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राय ने अदालत से 15 दिनों के लिए राहत मांगी थी. सहारा प्रमुख राय की बुआ का कल लखनउ में 90 वर्ष की आयु में देहावसान हो गया. राय को गत बुधवार को तिहाड जेल में वापस उनकी कोठरी में भेज दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विदेशों में सहारा समूह के लग्जरी होटलों के सौदों पर बातचीत के लिए जेल परिसर में ही एक वातानुकूलित जगह पर निश्चित अवधि तक रहने की छूट दी थी. अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल में उनकी कोठरी में भेज दिया गया.  अदालत ने 8 सितंबर को राय को तिहाड जेल के सम्मेलन कक्ष में ठहरने की अवधि 15 दिनों के लिए बढायी थी ताकि वह विदेशी सम्पत्तियों की बिक्री कर 10,000 करोड रुपये जुटा सकें. यह राशि सेबी के पास जमा करायी जानी है ताकि उन्हें जमानत मिल सके. 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एक अगस्त को राय और सहारा समूह के दो निदेशकों को तिहाड जेल परिसर में 5 अगस्त से 10 दिनों तक सुबह छह बजे से रात आठ बजे तक एसी सम्मेलन कक्ष का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी.  वहां इनकी बैठकों पर सीसीटीवी कैमरे की नजर रखी गयी. उन्हें वहां वाई-फाई और वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधा का इस्तेमाल करने की छूट थी. उन्हें दो लैपटाप, दो डेस्क टाप, एसटीडी और आईएसडी सुविधाओं वाले लैंड लाइनफोन तथा एक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की भी छूट थी. उनकी मदद के लिए लिखापढी करने वाले दो व्यक्ति और तकनीकी कौशल वाले एक व्यक्ति रखने की भी अनुमति थी. 65 वर्षीय राय इस साल 4 मार्च से तिहाड जेल में बंद हैं.

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